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मुकाशफ़ा 8:13 - किताब-ए मुक़द्दस

13 फिर देखते देखते मैंने एक उक़ाब को सुना जिसने मेरे सर के ऊपर ही बुलंदियों पर उड़ते हुए ऊँची आवाज़ से पुकारा, “अफ़सोस! अफ़सोस! ज़मीन के बाशिंदों पर अफ़सोस! क्योंकि तीन फ़रिश्तों के तुरमों की आवाज़ें अभी बाक़ी हैं।”

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

13 जब मैंने फिर निगाह की, तो आसमान के बीच में एक 'उक़ाब को उड़ते और बड़ी आवाज़ से ये कहते सुना, “उन तीन फ़रिश्तों के नरसिंगो की आवाज़ों की वजह से, जिनका फूँकना अभी बाक़ी है, ज़मीन के रहनेवालों पर अफ़सोस, अफ़सोस, अफ़सोस!”

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

13 जब मैंने फिर निगाह की तो एक बड़ा सा उक़ाब आसमान के फ़िज़ा में उड़ता देखा और उसे बुलन्द आवाज़ से ये कहते सुना, “उन तीन फ़रिश्तों के नरसिंगे की आवाज़ के बाइस जिन का फूंकना अभी बाक़ी है, अहल-ए-ज़मीन पर अफ़सोस, अफ़सोस, अफ़सोस!”

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मुकाशफ़ा 8:13

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