मुकाशफ़ा 16:18 - किताब-ए मुक़द्दस18 बिजलियाँ चमकने लगीं, शोर मच गया, बादल गरजने लगे और एक शदीद ज़लज़ला आया। इस क़िस्म का ज़लज़ला ज़मीन पर इनसान की तख़लीक़ से लेकर आज तक नहीं आया, इतना सख़्त ज़लज़ला कि Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201918 फिर बिजलियाँ और आवाज़ें और गरजें पैदा हुईं, और एक ऐसा बड़ा भुन्चाल आया कि जब से इंसान ज़मीन पर पैदा हुए ऐसा बड़ा और सख़्त भुन्चाल कभी न आया था। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा18 फिर बिजलियां कौंदी, आवाज़ें और बादलों की गरज पैदा हुईं, और एक ऐसा बड़ा ज़लज़ला आया के इन्सान के ज़मीन पर पैदा होने के वक़्त से ले कर अब तक ऐसा ज़लज़ला कभी नहीं आया था। Viz kapitola |