अम्सा 8:30 - किताब-ए मुक़द्दस30 तो मैं माहिर कारीगर की हैसियत से उसके साथ थी। रोज़ बरोज़ मैं लुत्फ़ का बाइस थी, हर वक़्त उसके हुज़ूर रंगरलियाँ मनाती रही। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201930 उस वक़्त माहिर कारीगर की तरह मैं उसके पास थी, और मैं हर रोज़ उसकी ख़ुशनूदी थी, और हमेशा उसके सामने शादमान रहती थी। Viz kapitola |