अम्सा 7:14 - किताब-ए मुक़द्दस14 “मुझे सलामती की क़ुरबानियाँ पेश करनी थीं, और आज ही मैंने अपनी मन्नतें पूरी कीं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201914 “सलामती की कु़र्बानी के ज़बीहे मुझ पर फ़र्ज़ थे, आज मैंने अपनी नज्रे़ अदा की हैं। Viz kapitola |