गिनती 30:3 - किताब-ए मुक़द्दस3 अगर कोई जवान औरत जो अब तक अपने बाप के घर में रहती है रब को कुछ देने की मन्नत माने या किसी चीज़ से परहेज़ करने की क़सम खाए Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20193 और अगर कोई 'औरत ख़ुदावन्द की मिन्नत माने और अपनी नौ जवानी के दिनों में अपने बाप के घर होते हुए अपने ऊपर कोई फ़र्ज़ ठहराए। Viz kapitola |