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मरक़ुस 12:31 - किताब-ए मुक़द्दस

31 दूसरा हुक्म यह है : ‘अपने पड़ोसी से वैसी मुहब्बत रखना जैसी तू अपने आपसे रखता है।’ दीगर कोई भी हुक्म इन दो अहकाम से अहम नहीं है।”

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

31 दूसरा हुक्म ये है: ‘अपने पड़ोसी से अपने बराबर मुहब्बत रख’ इस से बड़ा कोई हुक्म नहीं।”

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

31 और दूसरा ये है: ‘तुम अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखो।’ इन से बड़ा और कोई हुक्म नहीं।”

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मरक़ुस 12:31

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