मत्ती 23:18 - किताब-ए मुक़द्दस18 तुम यह भी कहते हो, ‘अगर कोई क़ुरबानगाह की क़सम खाए तो ज़रूरी नहीं कि वह उसे पूरा करे। लेकिन अगर वह क़ुरबानगाह पर पड़े हदिये की क़सम खाए तो लाज़िम है कि वह उसे पूरा करे।’ Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201918 फिर कहते हो ‘अगर कोई क़ुर्बानगाह की क़सम खाए तो कुछ बात नहीं; लेकिन जो नज़्र उस पर चढ़ी हो अगर उसकी क़सम खाए तो उसका पाबन्द होगा।’ Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा18 तुम कहते हो के, ‘अगर कोई क़ुर्बानगाह की क़सम खाये तो कोई हर्ज नहीं लेकिन अगर नज़्र की जो उस पर चढ़ाई जाती है, क़सम खाये तो क़सम का पाबन्द होगा।’ Viz kapitola |