मत्ती 12:7 - किताब-ए मुक़द्दस7 कलामे-मुक़द्दस में लिखा है, ‘मैं क़ुरबानी नहीं बल्कि रहम पसंद करता हूँ।’ अगर तुम इसका मतलब समझते तो बेक़ुसूरों को मुजरिम न ठहराते। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20197 लेकिन अगर तुम इसका मतलब जानते कि, मैं क़ुर्बानी नहीं बल्कि, रहम पसन्द करता हूँ। तो बेक़ुसूरों को क़ुसूरवार न ठहराते। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा7 अगर तुम इन आयात का मतलब जानते, ‘मैं क़ुर्बानी नहीं लेकिन रहमदिली को पसन्द करता हूं,’ तो तुम बेक़ुसूरों को क़ुसूरवार न ठहराते। Viz kapitola |