लूक़ा 6:42 - किताब-ए मुक़द्दस42 तू क्योंकर अपने भाई से कह सकता है, ‘भाई, ठहरो, मुझे तुम्हारी आँख में पड़ा तिनका निकालने दो’ जबकि तुझे अपनी आँख का शहतीर नज़र नहीं आता? रियाकार! पहले अपनी आँख के शहतीर को निकाल। तब ही तुझे भाई का तिनका साफ़ नज़र आएगा और तू उसे अच्छी तरह से देखकर निकाल सकेगा। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201942 और जब तू अपनी आँख के शहतीर को नहीं देखता तो अपने भाई से क्यूँकर कह सकता है, कि भाई ला उस तिनके को जो तेरी आँख में है निकाल दूँ? ऐ रियाकार। पहले अपनी आँख में से तो शहतीर निकाल, फिर उस तिनके को जो तेरे भाई की आँख में है अच्छी तरह देखकर निकाल सकेगा। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा42 और जब तुम्हारी अपनी ही आंख में शहतीर है जिसे तुम ख़ुद नहीं देख सकते तो किस मुंह से अपने भाई या बहन से कह सकते हो, लाओ, ‘मैं तुम्हारी आंख में से तिनका निकाल दूं,’ ऐ रियाकार! पहले अपनी आंख में से तो शहतीर निकाल, फिर अपने भाई या बहन की आंख में से तिनके को अच्छी तरह देखकर निकाल सकेगा। Viz kapitola |