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लूक़ा 6:35 - किताब-ए मुक़द्दस

35 नहीं, अपने दुश्मनों से मुहब्बत करो और उन्हीं से भलाई करो। उन्हें उधार दो जिनके बारे में तुम्हें वापस मिलने की उम्मीद नहीं है। फिर तुमको बड़ा अज्र मिलेगा और तुम अल्लाह तआला के फ़रज़ंद साबित होगे, क्योंकि वह भी नाशुक्रों और बुरे लोगों पर नेकी का इज़हार करता है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

35 मगर तुम अपने दुश्मनों से मुहब्बत रख्खो, और नेकी करो, और बग़ैर न उम्मीद हुए क़र्ज़ दो तो तुम्हारा अज्र बड़ा होगा और तुम ख़ुदा के बेटे ठहरोगे, क्यूँकि वो न — शुक्रों और बदों पर भी महरबान है।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

35 मगर तुम अपने दुश्मनों से महब्बत रखो, उन का भला करो, क़र्ज़ दो और उस के वसूल पाने की उम्मीद न रखो, तो तुम्हारा अज्र बड़ा होगा और तुम ख़ुदा तआला के बेटे ठहरोगे क्यूंके वह नाशुकरों और बदकारों पर भी मेहरबान है।

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लूक़ा 6:35

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