लूक़ा 2:37 - किताब-ए मुक़द्दस37 अब वह बेवा की हैसियत से 84 साल की हो चुकी थी। वह कभी बैतुल-मुक़द्दस को नहीं छोड़ती थी, बल्कि दिन-रात अल्लाह को सिजदा करती, रोज़ा रखती और दुआ करती थी। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201937 वो चौरासी बरस से बेवा थी, और हैकल से जुदा न होती थी बल्कि रात दिन रोज़ों और दु'आओं के साथ इबादत किया करती थी। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा37 अब वह बेवा थी और चौरासी बरस की हो चुकी थी। वह बैतुलमुक़द्दस से जुदा न होती थी बल्के रात दिन रोज़ों और दुआओं के साथ इबादत में लगी रहती थी। Viz kapitola |