अहबार 7:16 - किताब-ए मुक़द्दस16 इस क़ुरबानी का गोश्त सिर्फ़ इस सूरत में अगले दिन खाया जा सकता है जब किसी ने मन्नत मानकर या अपनी ख़ुशी से उसे पेश किया है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201916 लेकिन अगर उसके चढ़ावे की क़ुर्बानी मिन्नत का या रज़ा का हदिया हो, तो वह उस दिन खाई जाए जिस दिन वह अपनी क़ुर्बानी पेश करे; और जो कुछ उस में से बच रहे, वह दूसरे दिन खाया जाए। Viz kapitola |