नोहा 3:48 - किताब-ए मुक़द्दस48 आँसू मेरी आँखों से टपक टपककर नदियाँ बन गए हैं, मैं इसलिए रो रहा हूँ कि मेरी क़ौम तबाह हो गई है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201948 मेरी दुख़्तर — ए — क़ौम की तबाही के ज़रिए' मेरी आँखों से आँसुओं की नहरें जारी हैं। Viz kapitola |