नोहा 1:7 - किताब-ए मुक़द्दस7 अब जब यरूशलम मुसीबतज़दा और बेवतन है तो उसे वह क़ीमती चीज़ें याद आती हैं जो उसे क़दीम ज़माने से ही हासिल थीं। क्योंकि जब उस की क़ौम दुश्मन के हाथ में आई तो कोई नहीं था जो उस की मदद करता बल्कि उसके मुख़ालिफ़ तमाशा देखने दौड़े आए, वह उस की तबाही से ख़ुश होकर हँस पड़े। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20197 येरूशलेम को अपने ग़म — ओ — मुसीबत के दिनों में, जब उसके रहने वाले दुश्मन का शिकार हुए, और किसी ने मदद न की, अपने गुज़रे ज़माने की सब ने'मतें याद आईं, दुश्मनों ने उसे देखकर उसकी बर्बादी पर हँसी उड़ाई। Viz kapitola |