यहूदाह 1:12 - किताब-ए मुक़द्दस12 जब यह लोग ख़ुदावंद की मुहब्बत को याद करनेवाले रिफ़ाक़ती खानों में शरीक होते हैं तो रिफ़ाक़त के लिए धब्बे बन जाते हैं। यह डरे बग़ैर खाना खा खाकर उससे महज़ूज़ होते हैं। यह ऐसे चरवाहे हैं जो सिर्फ़ अपनी गल्लाबानी करते हैं। यह ऐसे बादल हैं जो हवाओं के ज़ोर से चलते तो हैं लेकिन बरसते नहीं। यह सर्दियों के मौसम में ऐसे दरख़्तों की मानिंद हैं जो दो लिहाज़ से मुरदा हैं। वह फल नहीं लाते और जड़ से उखड़े हुए हैं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201912 ये तुम्हारी मुहब्बत की दावतों में तुम्हारे साथ खाते — पीते वक़्त, गोया दरिया की छिपी चट्टानें हैं। ये बेधड़क अपना पेट भरनेवाले चरवाहे हैं। ये बे — पानी के बादल हैं, जिन्हें हवाएँ उड़ा ले जाती हैं। ये पतझड़ के बे — फल दरख़्त हैं, जो दोनों तरफ़ से मुर्दा और जड़ से उखड़े हुए Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा12 यह लोग तुम्हारे साथ महब्बत की ज़ियाफ़तों पर दाग़ हैं जिन का ज़मीर उन्हें इस में शामिल होते वक़्त थोड़ा भी मुजरिम नहीं ठहराता, ये ऐसे चरवाहे हैं जो सिर्फ़ अपना ही पेट भरते हैं। यह लोग बे पानी के उन बादलों की तरह हैं जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है, ये पतझड़ के ऐसे दरख़्त हैं जो दो बार मर चुके हैं क्यूंके ये फलदार नहीं हैं और अपनी जड़ से उखड़े हुए हैं। Viz kapitola |