यरमियाह 51:9 - किताब-ए मुक़द्दस9 लेकिन लोग कहेंगे, ‘हम बाबल की मदद करना चाहते थे, लेकिन उसके ज़ख़म भर नहीं सकते। इसलिए आओ, हम उसे छोड़ दें और हर एक अपने अपने मुल्क में जा बसे। क्योंकि उस की सख़्त अदालत हो रही है, जितना आसमान और बादल बुलंद हैं उतनी ही सख़्त उस की सज़ा है।’ Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20199 हम तो बाबुल की शिफ़ायाबी चाहते थे लेकिन वह शिफ़ायाब न हुआ, तुम उसको छोड़ो, आओ, हम सब अपने अपने वतन को चले जाएँ, क्यूँकि उसकी आवाज़ आसमान तक पहुँची और अफ़लाक तक बुलन्द हुई। Viz kapitola |