यरमियाह 2:13 - किताब-ए मुक़द्दस13 क्योंकि मेरी क़ौम से दो संगीन जुर्म सरज़द हुए हैं। एक, उन्होंने मुझे तर्क किया, गो मैं ज़िंदगी के पानी का सरचश्मा हूँ। दूसरे, उन्होंने अपने ज़ाती हौज़ बनाए हैं जो दराड़ों की वजह से भर ही नहीं सकते। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201913 क्यूँकि मेरे लोगों ने दो बुराइयाँ कीं:उन्होंने मुझ आब — ए — हयात के चश्मे को छोड़ दिया और अपने लिए हौज़ खोदे हैं शिकस्ता हौज़ जिनमें पानी नहीं ठहर सकता। Viz kapitola |