याक़ूब 4:11 - किताब-ए मुक़द्दस11 भाइयो, एक दूसरे पर तोहमत मत लगाना। जो अपने भाई पर तोहमत लगाता या उसे मुजरिम ठहराता है वह शरीअत पर तोहमत लगाता है और शरीअत को मुजरिम ठहराता है। और जब आप शरीअत पर तोहमत लगाते हैं तो आप उसके पैरोकार नहीं रहते बल्कि उसके मुंसिफ़ बन गए हैं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201911 ऐ, भाइयों एक दूसरे की बुराई न करो जो अपने भाई की बुराई करता या भाई पर इल्ज़ाम लगाता है; वो शरी'अत की बुराई करता और शरी'अत पर इल्ज़ाम लगाता है और अगर तू शरी'अत पर इल्ज़ाम लगाता है तो शरी'अत पर अमल करने वाला नहीं बल्कि उस पर हाकिम ठहरा। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा11 ऐ भाईयो और बहनों! तुम आपस में एक दूसरे की बदगोई न करो। जो अपने भाई की बदगोई करता और उस पर इल्ज़ाम लगाता है वह शरीअत की बदगोई करता है और उस पर इल्ज़ाम लगाता है। और अगर तुम शरीअत पर इल्ज़ाम लगाते हो तो तुम शरीअत पर अमल करने की बजाय उस का मुन्सिफ़ बन बैठे हो। Viz kapitola |