हज्जी 1:4 - किताब-ए मुक़द्दस4 क्या यह ठीक है कि तुम ख़ुद लकड़ी से सजे हुए घरों में रहते हो जबकि मेरा घर अब तक मलबे का ढेर है?” Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 “क्या तुम्हारे लिए महफ़ूज़ घरों में रहने का वक़्त है, जब कि यह घर वीरान पड़ा है? Viz kapitola |