गलतियों 6:3 - किताब-ए मुक़द्दस3 जो समझता है कि मैं कुछ हूँ अगरचे वह हक़ीक़त में कुछ भी नहीं है तो वह अपने आपको फ़रेब दे रहा है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20193 क्यूँकि अगर कोई शख़्स अपने आप को कुछ समझे और कुछ भी न हो, तो अपने आप को धोखा देता है। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा3 अगर कोई अपने आप को कुछ समझता है लेकिन कुछ भी नहीं है, तो वह ख़ुद को धोका देता है। Viz kapitola |