गलतियों 5:14 - किताब-ए मुक़द्दस14 क्योंकि पूरी शरीअत एक ही हुक्म में समाई हुई है, “अपने पड़ोसी से वैसी मुहब्बत रखना जैसी तू अपने आपसे रखता है।” Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201914 क्यूँकि पूरी शरी'अत पर एक ही बात से 'अमल हो जाता है, या; नी इससे कि “तू अपने पड़ोसी से अपनी तरह मुहब्बत रख।” Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा14 क्यूंके सारी शरीअत का ख़ुलासा इस एक हुक्म में पाया जाता है: “तुम अपने पड़ोसी से अपनी मानिन्द महब्बत रखो।” Viz kapitola |