गलतियों 5:11 - किताब-ए मुक़द्दस11 भाइयो, जहाँ तक मेरा ताल्लुक़ है, अगर मैं यह पैग़ाम देता कि अब तक ख़तना करवाने की ज़रूरत है तो मेरी ईज़ारसानी क्यों हो रही होती? अगर ऐसा होता तो लोग मसीह के मसलूब होने के बारे में सुनकर ठोकर न खाते। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201911 और ऐ भाइयों! अगर मैं अब तक ख़तना का एलान करता हूँ, तो अब तक सताया क्यूँ जाता हूँ? इस सूरत में तो सलीब की ठोकर तो जाती रही। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा11 ऐ भाईयो और बहनों! अगर मैं अब तक ख़तना की मुनादी करता हूं तो किस वजह से सताया जा रहा हूं? अगर मैं ख़तना की तालीम देता तो सलीब किसी के लिये ठोकर का बाइस न होती जिस की मैं मुनादी करता हूं। Viz kapitola |