गलतियों 3:21 - किताब-ए मुक़द्दस21 तो क्या इसका मतलब यह है कि शरीअत अल्लाह के वादों के ख़िलाफ़ है? हरगिज़ नहीं! अगर इनसान को ऐसी शरीअत मिली होती जो ज़िंदगी दिला सकती तो फिर सब उस की पैरवी करने से रास्तबाज़ ठहरते। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201921 पस क्या शरी'अत ख़ुदा के वा'दों के ख़िलाफ़ है? हरगिज़ नहीं! क्यूँकि अगर कोई एसी शरी'अत दी जाती जो ज़िन्दगी बख़्श सकती तो, अलबत्ता रास्तबाज़ी शरी'अत की वजह से होती। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा21 तो क्या शरीअत ख़ुदा के वादों के ख़िलाफ़ है? हरगिज़ नहीं। क्यूंके अगर कोई ऐसी शरीअत दी जाती जो ज़िन्दगी-बख़्श सकती, तो रास्तबाज़ी शरीअत के ज़रीये हासिल की जा सकती थी। Viz kapitola |