गलतियों 3:18 - किताब-ए मुक़द्दस18 क्योंकि अगर इब्राहीम की मीरास शरीअत की पैरवी करने से मिलती तो फिर वह अल्लाह के वादे पर मुनहसिर न होती। लेकिन ऐसा नहीं था। अल्लाह ने इसे अपने वादे की बिना पर इब्राहीम को दे दिया। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201918 क्यूँकि अगर मीरास शरी'अत की वजह से मिली है तो वा'दे की वजह से ना हुई, मगर अब्रहाम को ख़ुदा ने वा'दे ही की राह से बख़्शी। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा18 अगर मीरास का हुसूल शरीअत पर मब्नी है, तो वह वादे पर मब्नी नहीं हो सकता; लेकिन ख़ुदा ने फ़ज़ल से हज़रत इब्राहीम को यह मीरास अपने वादे ही के मुताबिक़ बख़्शी। Viz kapitola |