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गलतियों 3:17 - किताब-ए मुक़द्दस

17 कहने से मुराद यह है कि अल्लाह ने इब्राहीम से अहद बाँधकर उसे क़ायम रखने का वादा किया। शरीअत जो 430 साल के बाद दी गई इस अहद को रद्द करके अल्लाह का वादा मनसूख़ नहीं कर सकती।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

17 मेरा ये मतलब है: जिस 'अहद की ख़ुदा ने पहले से तस्दीक़ की थी, उसको शरी'अत चार सौ तीस बरस के बाद आकर बातिल नहीं कर सकती कि वो वा'दा लअहासिल हो।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

17 मेरा मतलब यह है के जो अह्द ख़ुदा ने हज़रत इब्राहीम के साथ बांधा था और जिस की उस ने तस्दीक़ कर दी थी, उसे शरीअत बातिल नहीं ठहरा सकती जो चार सौ तीस बरस बाद आई और न उस वादे को मन्सूख़ कर सकती है।

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गलतियों 3:17

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