गलतियों 3:15 - किताब-ए मुक़द्दस15 भाइयो, इनसानी ज़िंदगी की एक मिसाल लें। जब दो पार्टियाँ किसी मामले में मुत्तफ़िक़ होकर मुआहदा करती हैं तो कोई इस मुआहदे को मनसूख़ या इसमें इज़ाफ़ा नहीं कर सकता। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201915 ऐ भाइयों! मैं इंसान ियत के तौर पर कहता हूँ कि अगर आदमी ही का 'अहद हो, जब उसकी तस्दीक़ हो गई हो तो कोई उसको बातिल नहीं करता और ना उस पर कुछ बढ़ाता है। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा15 ऐ भाईयो और बहनों, मैं रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से एक मिसाल पेश करता हूं। जब एक बार किसी इन्सानी अह्द पर फ़रीक़ैन के दस्तख़त हो जाते हैं तो कोई उसे बातिल नहीं कर सकता, और न ही उस में कुछ बढ़ा सकता है। Viz kapitola |