Online Bible

- Reklamy -




गलतियों 3:11 - किताब-ए मुक़द्दस

11 यह बात तो साफ़ है कि अल्लाह किसी को भी शरीअत की पैरवी करने की बिना पर रास्तबाज़ नहीं ठहराता, क्योंकि कलामे-मुक़द्दस के मुताबिक़ रास्तबाज़ ईमान ही से जीता रहेगा।

Viz kapitola kopírovat

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

11 और ये बात साफ़ है कि शरी'अत के वसीले से कोई इंसान ख़ुदा के नज़दीक रास्तबाज़ नहीं ठहरता, क्यूँकि कलाम में लिखा है, रास्तबाज़ ईमान से जीता रहेगा।

Viz kapitola kopírovat

उर्दू हमअस्र तरजुमा

11 अब यह साफ़ ज़ाहिर है के शरीअत के वसीले से कोई शख़्स ख़ुदा की हुज़ूरी में रास्तबाज़ नहीं ठहराया जाता, क्यूंके लिख्खा है: “रास्तबाज़ ईमान से ज़िन्दा रहेगा।”

Viz kapitola kopírovat




गलतियों 3:11

Následuj nás:

Reklamy


Reklamy