गलतियों 2:21 - किताब-ए मुक़द्दस21 मैं अल्लाह का फ़ज़ल रद्द करने से इनकार करता हूँ। क्योंकि अगर किसी को शरीअत की पैरवी करने से रास्तबाज़ ठहराया जा सकता तो इसका मतलब यह होता कि मसीह का मरना अबस था। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201921 मैं ख़ुदा के फ़ज़ल को बेकार नहीं करता, क्यूँकि रास्तबाज़ी अगर शरी'अत के वसीले से मिलती, तो मसीह का मरना बेकार होता। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा21 मैं ख़ुदा के इस फ़ज़ल को रद्द नहीं करता, क्यूंके अगर रास्तबाज़ी शरीअत के वसीले से हासिल की जा सकती थी, तो अलमसीह ने बिला मक़सद अपनी जान क़ुर्बान की!” Viz kapitola |