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हिज़क़ियेल 1:9 - किताब-ए मुक़द्दस

9 जानदार अपने परों से एक दूसरे को छू रहे थे। चलते वक़्त मुड़ने की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि हर एक के चार चेहरे चारों तरफ़ देखते थे। जब कभी किसी सिम्त जाना होता तो उसी सिम्त का चेहरा चल पड़ता।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

9 कि उनके पर एक दूसरे के साथ जुड़े थे और वह चलते हुए मुड़ते न थे बल्कि सब सीधे आगे बढ़े चले जाते थे।

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हिज़क़ियेल 1:9

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