वाइज़ 5:17 - किताब-ए मुक़द्दस17 जीते-जी वह हर दिन तारीकी में खाना खाते हुए गुज़ारता, ज़िंदगी-भर वह बड़ी रंजीदगी, बीमारी और ग़ुस्से में मुब्तला रहता है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201917 वह उम्र भर बेचैनी में खाता है, और उसकी दिक़दारी और बेज़ारी और ख़फ़्गी की इन्तिहा नहीं। Viz kapitola |