2 कुरि 4:2 - किताब-ए मुक़द्दस2 हमने छुपी हुई शर्मनाक बातें मुस्तरद कर दी हैं। न हम चालाकी से काम करते, न अल्लाह के कलाम में तहरीफ़ करते हैं। बल्कि हमें अपनी सिफ़ारिश की ज़रूरत भी नहीं, क्योंकि जब हम अल्लाह के हुज़ूर लोगों पर हक़ीक़त को ज़ाहिर करते हैं तो हमारी नेकनामी ख़ुद बख़ुद हर एक के ज़मीर पर ज़ाहिर हो जाती है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 बल्कि हम ने शर्म की छिपी बातों को तर्क कर दिया और मक्कारी की चाल नहीं चलते न ख़ुदा के कलाम में मिलावट करते हैं' बल्कि हक़ ज़ाहिर करके ख़ुदा के रु — ब — रु हर एक आदमी के दिल में अपनी नेकी बिठाते हैं। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा2 हम ने शरम की पोशीदा बातों को तर्क कर दिया है; हम मक्कारी की चाल नहीं चलते, और न ही ख़ुदा के कलाम में आमेज़िश करते हैं बल्के जो हक़ है उसे ज़ाहिर कर के ख़ुदा के हुज़ूर हर शख़्स के दिल में अपनी नेकनियती बिठाते हैं। Viz kapitola |