2 कुरि 3:6 - किताब-ए मुक़द्दस6 उसी ने हमें नए अहद के ख़ादिम होने के लायक़ बना दिया है। और यह अहद लिखी हुई शरीअत पर मबनी नहीं है बल्कि रूह पर, क्योंकि लिखी हुई शरीअत के असर से हम मर जाते हैं जबकि रूह हमें ज़िंदा कर देता है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20196 जिसने हम को नए'अहद के ख़ादिम होने के लायक़ भी किया लफ़्ज़ों के ख़ादिम नहीं बल्कि रूह के क्यूँकि लफ़्ज़ मार डालते हैं मगर रूह ज़िन्दा करती है। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा6 जिस ने हमें नये अह्द के ख़ादिम होने के लाइक़ भी किया। तहरीरी निज़ाम के नहीं बल्के रूह के ख़ादिम हैं; क्यूंके तहरीरी निज़ाम मार डालता है, मगर पाक रूह ज़िन्दगी अता करती है। Viz kapitola |