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2 कुरि 12:6 - किताब-ए मुक़द्दस

6 अगर मैं फ़ख़र करना चाहता तो इसमें अहमक़ न होता, क्योंकि मैं हक़ीक़त बयान करता। लेकिन मैं यह नहीं करूँगा, क्योंकि मैं चाहता हूँ कि सबकी मेरे बारे में राय सिर्फ़ उस पर मुनहसिर हो जो मैं करता या बयान करता हूँ। कोई मुझे इससे ज़्यादा न समझे।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

6 और अगर फ़ख़्र करना चाहूँ भी तो बेवक़ूफ़ न ठहरूँगा इसलिए कि सच बोलूँगा मगर तोभी बा'ज़ रहता हूँ ताकि कोई मुझे इस से ज़्यादा न समझे जैसा मुझे देखा है या मुझ से सुना है।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

6 अगर फ़ख़्र करना चाहूं भी, तो यह मेरी बेवक़ूफ़ी नहीं समझी जायेगी, इसलिये के मैं सच बोल रहा हूं। बहरहाल में फ़ख़्र करने से बाज़ रहूंगा, क्यूंके जो कोई जैसा मुझे देखता है या जैसा मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर न समझे,

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2 कुरि 12:6

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