2 कुरि 12:13 - किताब-ए मुक़द्दस13 जो ख़िदमत मैंने आपके दरमियान की, क्या वह ख़ुदा की दीगर जमातों में मेरी ख़िदमत की निसबत कम थी? हरगिज़ नहीं! इसमें फ़रक़ सिर्फ़ यह था कि मैं आपके लिए माली बोझ न बना। मुझे मुआफ़ करें अगर मुझसे इसमें ग़लती हुई है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201913 तुम कौन सी बात में और कलीसियाओं में कम ठहरे बा वजूद इसके मैंने तुम पर बौझ न डाला? मेरी ये बेइन्साफ़ी मु'आफ़ करो। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा13 मेरा माली बोझ उठाने के सिवा तुम दूसरी जमाअतों से किसी भी बात में कम न ठहरे। मैं दरअस्ल तुम पर बोझ नहीं बनना चाहता था। अगर ये नाइन्साफ़ी है तो मैं मुआफ़ी चाहता हूं। Viz kapitola |