2 कुरि 11:26 - किताब-ए मुक़द्दस26 मेरे बेशुमार सफ़रों के दौरान मुझे कई तरह के ख़तरों का सामना करना पड़ा, दरियाओं और डाकुओं का ख़तरा, अपने हमवतनों और ग़ैरयहूदियों के हमलों का ख़तरा। जहाँ भी मैं गया हूँ वहाँ यह ख़तरे मौजूद रहे, ख़ाह मैं शहर में था, ख़ाह ग़ैरआबाद इलाक़े में या समुंदर में। झूटे भाइयों की तरफ़ से भी ख़तरे रहे हैं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201926 मैं बार बार सफ़र में दरियाओं के ख़तरों में डाकूओं के ख़तरों में अपनी क़ौम से ख़तरों में ग़ैर क़ौमों के ख़तरों में शहर के ख़तरों में वीरान के ख़तरों में समुन्दर के ख़तरों में झूठे भाइयों के ख़तरों में। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा26 में अपने सफ़र के दौरान बारहा दर्याओं के ख़तरों में, डाकूओं के ख़तरों में, अपनी क़ौम के और ग़ैरयहूदियों के, शहर के, ब्याबान के, समुन्दर के ख़तरों में; झूटे मोमिनीन भाईयों के ख़तरों में घिरा रहा हूं। Viz kapitola |