1 कुरि 9:16 - किताब-ए मुक़द्दस16 लेकिन अल्लाह की ख़ुशख़बरी की मुनादी करना मेरे लिए फ़ख़र का बाइस नहीं। मैं तो यह करने पर मजबूर हूँ। मुझ पर अफ़सोस अगर इस ख़ुशख़बरी की मुनादी न करूँ। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201916 अगर ख़ुशख़बरी सुनाऊँ तो मेरा कुछ फ़ख़्र नहीं क्यूँकि ये तो मेरे लिए ज़रूरी बात है बल्कि मुझ पर अफ़सोस है अगर ख़ुशख़बरी न सुनाऊँ। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा16 अगर मैं इन्जील की मुनादी करता हूं, तो इसलिये नहीं के शेख़ी बघारूं, क्यूंके यह तो मेरा फ़र्ज़ है। बल्के मुझ पर अफ़सोस! अगर मैं इन्जील की मुनादी न करूं। Viz kapitola |