1 कुरि 8:7 - किताब-ए मुक़द्दस7 लेकिन हर किसी को इसका इल्म नहीं। बाज़ ईमानदार तो अब तक यह सोचने के आदी हैं कि बुत का वुजूद है। इसलिए जब वह किसी बुत की क़ुरबानी का गोश्त खाते हैं तो वह समझते हैं कि हम ऐसा करने से उस बुत की पूजा कर रहे हैं। यों उनका ज़मीर कमज़ोर होने की वजह से आलूदा हो जाता है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20197 लेकिन सब को ये इल्म नहीं बल्कि कुछ को अब तक बुतपरस्ती की आदत है इसलिए उस गोश्त को बुत की क़ुर्बानी जान कर खाते हैं और उसका दिल, चुँकि कमज़ोर है, गन्दा हो जाता है। Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा7 लेकिन यह इल्म सब को नहीं है। बाज़ लोग अब तक बुतों को की परसतिश के आदी हैं इसलिये जब वह क़ुर्बानी के गोश्त इस ख़्याल से खाते हैं के यह किसी ख़ुदा की नज़्र की क़ुर्बानी है, तो अपने ज़मीर की कमज़ोरी की वजह से, वह अपने आप को नापाक समझने लगते हैं। Viz kapitola |