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1 कुरि 8:1 - किताब-ए मुक़द्दस

1 अब मैं बुतों की क़ुरबानी के बारे में बात करता हूँ। हम जानते हैं कि हम सब साहबे-इल्म हैं। इल्म इनसान के फूलने का बाइस बनता है जबकि मुहब्बत उस की तामीर करती है।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

1 अब बुतों की कुर्बानियों के बारे में ये है हम जानते हैं कि हम सब इल्म रखते हैं इल्म ग़ुरूर पैदा करता है लेकिन मुहब्बत तरक़्क़ी का ज़रिया है।

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उर्दू हमअस्र तरजुमा

1 उन क़ुर्बानियों के बारे में जो बुतों को पेश की जाती हैं: “मेरा कहना यह है के हम सब इल्म रखते हैं।” इल्म ग़ुरूर पैदा करता है लेकिन महब्बत तरक़्क़ी बख़्शती है।

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1 कुरि 8:1

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