1 कुरि 13:4 - किताब-ए मुक़द्दस4 मुहब्बत सब्र से काम लेती है, मुहब्बत मेहरबान है। न यह हसद करती है न डींगें मारती है। यह फूलती भी नहीं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 मुहब्बत साबिर है और मेहरबान, मुहब्बत हसद नहीं करती, मुहब्बत शेख़ी नहीं मारती और फ़ूलती नहीं; Viz kapitolaउर्दू हमअस्र तरजुमा4 महब्बत सब्र और मेहरबान होती है। हसद नहीं करती, शेख़ी नहीं मारती, घमंड नहीं करती। Viz kapitola |