प्रकास 18:23 - चितवनिया थारु23 डिबरिक इजोर तोरमा फेरि कबहुँ नाहिँ देखेतइ, याबेसे तोरमा दुलहा हसे दुलहिक स्वर फेरि कबहुँ नाहिँ सुनेतइ। केहकेकि तोर व्यपरियवाह धरतियाक जम्मे धनि-धनि मन्सेसभ रहलइ, तोर मन्तरसे धरतियाक जम्मे मन्सावाह ठगाइल रहलइ।” Viz kapitola |