21 केहकेकि मन्सेक पुतर त धरमसास्तरवामा लिखइलि नहिँया मरहिँ परतइ, बाकि उअ मन्सावाके धिकार बडइ, जुने मन्सेक पुतरके धोखा देबिय! बरु उअ मन्सावा नाहिँ जरमल रहतिय त वकर तहिँया यसल हतिय।”