मतिक लिखल सुसमाचार 6:2 - चितवनिया थारु2 “जब तोहरा गरिबवाके किहो देबह कपटियानि नहिँया हाला झिन करिह। हुनुका त मन्सावानिसे प्रसंसा पावेके तहिँया सभाघरवाह हसे गलियावाहमा धुतुहा बजोसइ। मुइ तोहराके सदियो कहबहिँ, हुनुका यापन इनाम पासकले बडइ। Viz kapitola |