मतिक लिखल सुसमाचार 13:15 - चितवनिया थारु15 केहकेकि इअ मन्सावानिक हृदय मटखर भेल बडइ। हिनिकर कनवा बहिर भेल बडइ। हिनिका यखिया बन्द करले बडइ। नत हिनिका यापन यखियासे देखतिय, हसे कनवासे सुनतिय हसे यापन हृदयसे बुझतिय, तके हुनुका यापन-यापन पाप मानके मोरवरि फिरतिय हसे मुइ हुनुकाके डउल बनोतहिँ।’ Viz kapitola |