गलाति 5:17 - चितवनिया थारु17 केहकेकि हमार मनवाक पाप स्वभावक चाहना पवितर-आत्माक चाहनाक विरोध करसइ हसे पवितर-आत्माक चाहना हमार मनवाक पाप स्वभावक चाहनाक विरोध करसइ। इअ दुन्हु एक-दोसरिक विरोध करसइ, उहेसे तोहार करे खोजलि कमवा करे हइने सकसह। Viz kapitola |