प्रेरित 28:27 - चितवनिया थारु27 केहकेकि इअ मन्सावानिक मनवा भोथर भेल बडइ हसे हुनुकर कनवा मटखर भेल बडइ। हुनुका यापन यखिया बन्द करले बडइ, नतक हुनुकर यखिया देखतिय, कनवासे सुनतइ, हृदयसे बुझतइ। तब हुनुका यापन मनवा मोरवरि फिरोतइ हसे मुइ हुनुकाके डउल बनोतहिँ।” Viz kapitola |