प्रकासित बाक्य 20:12 - बृज भासा12 फिर मैनें छौटे बड़े सब मरे भये लोगन कूं राजगद्दी के सामई ठाड़ौ देखौ हतो कछू किताबें खोली गयीं फिर एक और किताब खोली गयी जि “जीबन की किताब हती” जामें मरे भये लोगन के कामन के अनुसार लिखौ भयौ न्याय करौ गयौ। Viz kapitola |