प्रकाशित 1:15 - बग़ल्याणी15 तेसरे पैर खरे पीतल़ो जेड़े थे मानो आगी री पट्ठिया रे तपाई राखे और तेसरी आवाज मुखते पाणिए री छेड़ा जेड़ी थी। Viz kapitolaपहाड़ी महासुई15 तेसरै बांगणै आगी रै गेठै दी तौपाऐ औन्दै च़ौमकिलै पितल़ा ज़िणै थै, और तेसरी आवाज़ समुन्दरा रै बौड़ै छ़ालै ज़िणी आ। Viz kapitola |