प्रकाशित वाक्य 3:18 - हरियाणवी18 इस करकै मै तन्नै राय दियुँ सूं, के आग म्ह त्याया होड़ सोन्ना मेरै तै मोल ले, के तू साहूकार हो जावै, अर धोळा लत्ता ले-ले के पहर कै तन्नै अपणे उघाड़ेपण पै शर्म न्ही आवै, अर अपणी आँखां म्ह लाण कै खात्तर सुरमा ले, के तू देक्खण लाग्गै। Viz kapitola |