प्रकाशित वाक्य 18:19 - हरियाणवी19 अर अपणे-अपणे सिरां पै धूळ गेरैंगें, अर रोन्दे होए अर कळपदे होए किल्की मार-मारकै कहवैंगें, के, हाय! हाय! यो बड्ड़ा नगर जिसकी सम्पत्ति कै जरिये समुन्दर के सारे जहाज आळे साहूकार होगे थे, इब थोड़ी-ए देर म्ह तू उजड़ ग्या। Viz kapitola |