प्रकाशित 14:14 - पहाड़ी महासुई14 मुंइऐ देखौ, एक उज़ल़ौ बादल़ आ, और तेस बादल़ा माथै आदमी रै छ़ोहरु बाशीऐ कुण बोशौ औन्दौ आ, ज़ासरै मुंडा माथै सुनै रौ ताज़ और हाथा दी च़ोखी दाची आ। Viz kapitolaबग़ल्याणी14 तेबे मैं नजर दित्ती और देखो, एक उजल़ा बादल़ था और तेस बादल़ो पाँदे माणूं रे पुत्रो जेड़ा कोई बैठी रा था, जेसरे सिरो पाँदे सुईने रा मुकट और आथो रे पैनी दराटी थी। Viz kapitola |